

आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षित बालिकाओं को फिर लगी हाथ निराशा
बालिकाओं के लिए नहीं की गई बालिका छात्रावास की घोषणा
छात्राओ के मामले में फिर समाज के जन प्रतिनिधियों – प्रबुद्धजनों ने साधा मौन ?
आखिरकार बालिका शिक्षा में बालिकाओं का कैसे होगा उत्थान?
नैनवां/उनियारा(मदन लाल सैनी) – नैनवॉं में आयोजित अखिल नागरचाल धाकड़ प्रतिभा सम्मान समारोह 2022 में मंत्री अशोक चांदना ने शिरकत की तथा मंत्री ने अपने कर कमलों से प्रतिभाओं को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मंत्री को नेशनल हाईवे से धाकड़ समाज के लोग ढोल नगाड़े के साथ स्वागत करते हुए हुए आयोजित स्थल पर ससम्मान लेकर आए तथा पुष्प वर्षा, मालाओं तथा साफा बंधवा कर आदर सत्कार किया। आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि जीवन में शिक्षा की किमत ही महत्वपूर्ण है, इसी से जीवन का विकास होता है। सभी को लगातार मेहनत करने से मंजिल मिलती है तथा जीवन में हताश होने से नहीं। छात्रावास के विकास से गरीब बच्चों का विकास संभव है। वही उन्होंने कहा कि सरकार आमजनों के विकास के लिए हर पल काम कर रही है और सरकार के पास विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है। जन प्रतिनिधि भी आमजनों की भावना के अनुसार 36कौमों की कसौटी पर खरे उतरने की कोशिश करे जिससे जनता का विकास हो। इस लोकतंत्र में कानून के अनुसार ही काम हो जिससे किसी का नुकसान ना हो तथा सभी का विकास हो। वही समाज के जन प्रतिनिधियों तथा प्रबुद्धजनों ने भी अपनी संबोधन में समाज विकास को लेकर जोर दिया और कहा कि सभी एकजुटता से समाज विकास पर ध्यान दें। इस अवसर पर समाज की प्रतिभाएं, महिलाएं, युवक युवतियां, प्रबुद्धजन, समाज के जन प्रतिनिधि तथा कर्मचारी परिषद के सदस्य मौजूद थे।
मंत्री चांदना ने की दस लाख रुपये की घोषणा- आयोजित समारोह को संबोधित करते समय उदबोधन के दौरान मंत्री चांदना ने दस लाख रुपये की घोषणा की जिस पर समाज बंधुओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन पैसे से समाज छात्रावास का निर्माण करें जिससे प्रतिभाओं का विकास हो।
आखिरकार कैसे होगा बालिकाओं का विकास?- आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षित बालिकाओं को फिर से एक बार हाथ निराशा लगी है। इस गंभीर मामले को लेकर समाज के जन प्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों, कर्मचारी परिषद् के सदस्यों सहित अन्य ने बालिका छात्रावास निर्माण मामले में मौन साधे रहे जिसके चलते हुए शिक्षित बालिकाओं को केवल निराशा ही हाथ लगी। जबकि मंच पर महिला शक्ति स्वरूप महिला, समाज के जन प्रतिनिधि, प्रसाशनिक अधिकारी सहित गणमान्य मौजूद थे। मंच से हर मसले पर संबोधन दिए गए तथा घोषणाएं हुई लेकिन किसी ने बालिका छात्रावास निर्माण मामले में किसी ने कुछ बोलना मुनासिब नहीं समझा जिसके कारण सवालियां निशान उठ गए कि आखिरकार बालिकाओं का विकास कैसे होगा? वही सवाल यह भी उठ गया कि आखिरकार बालिका छात्रावास मामले में किसी ने कुछ भी क्यों नहीं बोला?
ज्ञातव्य रहे कि पूर्व में गत वर्ष आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह मांड़कला में कई समाज के जन प्रतिनिधियों तथा प्रबुद्धजनों ने कहा था कि आने वाले साल में बालिका छात्रावास निर्माण होगा लेकिन आयोजित सम्मान समारोह में इस मामले में बालिकाओं को कुछ भी नसीब नहीं हुआ जिसके चलते हुए “कहते कुछ है और करते कुछ है” कहावत चरितार्थ हुई। इससे समाज के कुछ लोगो मे रोष साफ नजर आया।


