बूंदी / नैनवां ( नीरज गौड़ ) – उपखंड क्षेत्र में जहां एक ओर आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लिए नैनवां एक मात्र नजदीकी बाजार होने से यहां प्रतिदिन करोड़ो का व्यापार होता है तो वही क्षेत्र के कुछ भ्रष्ट व्यापारियों द्वारा लगातार एमआरपी से अधिक पैसे ग्राहकों से वसूलने की शिकायत मिलती रहती है। क्षेत्र में किराना व्यापार, ईमित्र व्यापार, मिस्त्री व्यापार, इलेक्ट्रॉनिक व इलेक्ट्रिकल व्यापार, मेडिकल, कृषि व्यापार, कपड़ा व्यवसाय, मोबाइल व रिचार्ज व्यवसाय, दूध व्यवसाय, सब्जी व्यवसाय, होटल व्यवसाय, मैरिज गार्डन व्यवसाय, फास्ट फूड व्यवसाय, मिस्त्री से जुड़े व्यवसाय, कंप्यूटर व्यवसाय, बर्तन व दहेज सामान व्यवसाय, वाहन शोरूम, खाद बीज कृषि से जुड़े व्यवसाय, बीमा व्यवसाय , कॉस्मेटिक बाजार, भवन निर्माण सामग्री व्यवसाय आदि सभी व्यापारों से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए आस पास के छोटे व्यापारी व उपभोगता नैनवां आते है लेकिन यहां कुछ भ्रष्ट व्यापारियों द्वारा उनसे एमआरपी से अधिक मूल्य ले लिया जाता है जिससे अब लोगो का रुख बड़े शहरों की ओर हो गया है।
कई जगह मूल्य निर्धारण तक नही – क्षेत्र में कई बड़े व्यापार ऐसे भी है जहां उनके द्वारा दी जाने वाली सेवा या उत्पाद का मूल्य निर्धारण तक नही किया गया है। इसे उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो मैरिज गार्डन आदि व्यवसाय में इनका किराया मनचाहा वसूला जाता है, हर एक बुकिंग का अमाउंट अलग अलग होता है जिससे आमजन को उनके मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता दिखाई नही देती व बिलिंग तक में भी अंतर हो जाता है।
ये है नियम व कानून – MRP (मैक्सिमम रिटेल प्राइज/ अधिकतम खुदरा मूल्य) भारत मे बेचे जाने वाले निर्माताओं द्वरा अधिकतम कीमत तक कि जाति है। इसका उपयोग उत्पाद का मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता रखना है। उपभोगता वस्तु अधिनियम 2006 के तहत विक्रेता द्वारा MRP से अधिक मूल्य लेना कानूनन अपराध है।
ठंडी करके बेची जाने वाली वस्तुओं पर नही ले सकते MRP से अतिरिक्त राशि – देश मे जहां mrp से अधिक मूल्य लेना अपराध है वही क्षेत्र में एक व दो रुपये के सिक्कों के चलन कम होने से मजबूरी में कई जगह MRP से अधिक दाम वसूले जा रहे है।
दूध, दही, कोल्ड्रिंक, पानी, ठंडी रखे जाने वाली मेडिसिन, सब्जियां सहित कोल्ड स्टोर किये जाने वाले उत्पाद पर भी इसका अतिरिक्त शुल्क वसूलना अपराध है। उत्पाद पर अंकित MRP मे ये सभी खर्च पूर्व में ही जुड़े होते है जबकि कई जगह इसके नाम से अतिरिक्त धन आमजन से लिया जाता है जो पूर्णतया गलत है।
