
नागौर (प्रदीप कुमार डागा) – राज्य सरकार की सौ दिवसीय कार्ययोजना के तहत गुरुवार को जिला मुख्यालय पर टाऊन हॉल में जिला स्तरीय अहिंसा एवं कौमी एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें शांति एवं अहिंसा निदेशालय के अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी विजयशरण गुप्ता व निदेशालय प्रतिनिधि रमेश सिंह के मुख्य आतिथ्य में द्वीप प्रज्जवल्लित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में रामप्रकाश बाना ने विविधता में एकता विषय पर अपना संबोधन दिया। जिसमें उन्होंने भारतीय संविधान के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए मौलिक अधिकार व समानता का अधिकार पर जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने शांति से जुड़े महात्मा गांधी के संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व में जहां गृह युद्ध की परिस्थितियां बनती है वहां शांति की जरूरत महसूस की जा सकती है। भारतीय संविधान में यह विशेषता है कि यहां अनेकता में भी एकता है। आज विश्व में आतंकवाद की घटनाएं, युद्ध की गतिविधियां आदि को देखे तो उन सभी में शांति की महती आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि कला संकाय में एक शाखा के रूप में शांति अध्याय की स्थापना जरूरी है। बच्चों में शांति की परिस्थितियां कायम करने के लिए सभी वर्गों को आगे आना होगा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा शांति व अहिंसा का जो संदेश दिया गया था, वे समय की परिस्थितियों के अनुकूल था। इस दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन के लाठीचार्ज, मारपीट आदि घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने इन सभी का विरोध शांति से ही किया था।
इसके बाद राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय गिन्नाणी की छात्रा पिंकी सारस्वत ने कौमी एकता तथा अहिंसा पर अपने विचार व्यक्त किए। जिसमें उन्होंने जैन धर्म में अहिंसा का पालन, कौमी एकता का तात्पर्य, कौमी एकता के आयोजन का शुभारंभ आदि के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर छात्रा पूनम परिहार ने भी अपने विचार रखें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीआर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य प्रेमसिंह बुगासरा ने कहा कि राष्ट्रीय एकता में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सब एक है, हम सब भारतवासी है, ऐसा विचार रखेंगे तो राष्ट्र एकता मजबूत होगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि नेहरु युवा केंद्र, एनसीसी,एनएसएस आदि अनेक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों व संस्थाओं के माध्यम से अलग-अलग राज्यों के संभागी प्रतिभागी दूसरे राज्यों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर वहां की संस्कृति के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि नेल्सन मंडेला ने कहा कि युवा भविष्य का नेता है, वह जो देश का स्वरुप चाहते हैं, अपने विचार प्रकट करें, ताकि वैसा ही परिवेश बन सके। इस दौरान उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता से राष्ट्रीय एकता कमजोर होती है। इसलिए सभी के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करें।
कार्यक्रम में मंच संचालन करते हुए मोहम्मद शरीफ छींपा ने कहा कि कौमी एकता का मतलब है अनेकता में एकता है। हमारे आपसी मतभेद और मनभेद नहीं होने चाहिए। कौमी एकता दिवस धर्मनिरपेक्षता, अहिंसा, आपसी सौहार्द, सांप्रदायिकता, सांस्कृतिक एकता, कमजोर वर्गों के विकास और खुशहाली, अल्पसंख्यकों के महिला और संरक्षण के मुद्दों को उजागर करने के लिए आयोजित किया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रा मनीषा कालवा ने अहिंसा व कौमी एकता पर विचार प्रकट करते हुए कविता प्रस्तुत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश विविधताओं से भरा हुआ है, फिर भी देश में एकता है। एकता बनाए रखने के लिए सभी अच्छी मेहनत करें, अहिंसा व एकता के साथ कड़ी मेहनत भी जरुरी है।
इस अवसर पर वाइस प्रिंसिपल नरेंद्र डिडेल ने शांति व अहिंसा पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि इन सब के साथ आज तकनीकी से भी दोस्ती करना जरूरी है। आज की पीढ़ी के लिए तकनीकी बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अहिंसा व कौमी एकता के साथ-साथ तकनीकी पर भी ध्यान देना जरूरी हो गया है।
कार्यक्रम में कलेक्ट्रेट आरटीआई अनुभाग शाखा प्रभारी नंदलाल रोज ने केंद्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं पर जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने योजनाओं की जानकारी देते हुए सभी को इसका अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया।
इस दौरान जिला स्तरीय कार्यक्रम में शांति एवं अहिंसा प्रकोष्ठ अधिकारी मनोहरलाल मांडण, चिकित्सा विभाग के हेमंत उज्जवल, आजीविका समूह की संजू, सृष्टि आदि ने भी अपने विचार रखते हुए अहिंसा एवं कौमी एकता पर विभिन्न प्रकार की कविताएं भी प्रस्तुत की।
