बूंदी ( नीरज गौड़ ) – नैनवां उपखण्ड के समीधी गांव में प्रस्तावित हरिकंवर गौशाला मे चल रही श्री मद् भागवत कथा के चतुर्थ सोपान में कथा व्यास प्रेम नारायण जी ने कहा कि संसार में सर्वत्र कृष्ण ही कृष्ण है। भगवान से हटकर कुछ भी नहीं है।। जैसे बर्फ का आकार व स्वभाव अलग है लेकिन परिणाम रूप में वह जल ही है उसी प्रकार जो बाहर की आंखों से देख रहा है उसके लिए संसार ही संसार है और जो भीतर की आंख से देख रहा है उसके लिए सारा संसार कृष्णमय है। संसार सच्चा नहीं है यह तो केवल सपना है। भगवान ही सच्चे हैं और अपने हैं।” ईश्वर है और कुछ भी नहीं है ।एक ही है और कुछ भी नहीं है।” भजन को श्रद्धालुओं ने बड़े भाव विभोर होकर गाया।। तीसरी आंख कब और कैसे खुलती है इसके बारे में बताते हुए कहा कि भगवान को अपना मानने से प्रेम बढ़ता है। प्रेम अधिक बढ़ने पर भीतर की आंख खुलती है ।भीतर की आंख खुलने पर जीव , शिव हो जाता है। नर से नारायण बन जाता है ।अतः भगवान से प्रार्थना करो कि बाहर के चर्मचक्षु बंद होने से पहले पहले हमारे भीतर की आंख खोल देना। तीसरी आंख सब में होती है और खुलती भी है ।तीसरी आंख को दिव्य चक्षु भी कहते हैं जो अर्जुन के खुली थी ।गीता ज्ञान के माध्यम से श्रीहरि ने अर्जुन को सच्चाई दिखा दी। अपने भीतर की तीसरी आंख खोलने के लिए सत्संग करो। भजन करो।सेवा करो। नाम जप करो। हर दिन को जीवन का आखिरी दिन व हर सांस को आखिरी सांस मानकर भगवान से प्रार्थना करो। ऐसा करने से कृष्ण की ऊर्जा आप में प्रवेश करेगी औरआपके भीतर की तीसरी आंख खुल जाएगी। भगवान कृष्ण के प्राकट्योत्सव की वेला में “नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ” भजन की धुन पर सारा पांडाल झूम कर नाचने लगा। भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी प्रदर्शित की गई। पुष्प वर्षा की गई। एक दूसरे के हल्दी लगाकर बधाईयां दी गई।
कथा में आसपास के क्षेत्र के श्रोताओ के साथ ही बूंदी, कोटा, हनुमान नगर, भीलवाड़ा, टोंक सहित दूर दूर से कथा प्रेमी पहुंचे जिन्होंने कथा अमृत पान किया।
